Let Us Help Each Other-आओ एक दूसरे की मदद करें

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आओ एक दूसरे की मदद करें-Let Us Help Each Other

हम जिस समाज में रहते हैं, उसी सामाजिक ताने-बाने से हमारा जीवन चलता है. हमें सदैव एक दूसरे की मदद की आवश्यकता होती रहती है. जरूरत पड़ने पर अगर हम किसी की मदद कर सकते हैं, तो यह बहुत बड़ा परोपकार होता है, बेहद पुण्य का कार्य होता है.

तो चलिये आज की पोस्ट-आओ एक दूसरे की मदद करें(Let Us Help Each Other) में हम यही जानेंगे कि हम एक दूसरे की मदद कैसे और किस तरीके से कर सकते हैं?

हमें एक दूसरे की मदद क्यों करनी चाहिए(Importance of helping others)?

सामाजिक प्राणी होने के नाते हमें एक-दूसरे के साथ की आवश्यकता सदैव बनी रहती है. एक- दूजे से ही हमारे जीवन की समस्त आवश्यकतायें पूरी होती हैं.

हम चाहे जिस भी स्थान पर रहते हैं, वहां पर हमारा काम अन्य लोगों की मदद के बगैर नहीं चल सकता. हमें किसी ना किसी की मदद की आवश्यकता जरूर होती है. हम एक सामाजिक प्राणी हैं और उस समाज में एक दूसरे के लिए एक दूसरे का साथ बहुत ही अपरिहार्य या आवश्यक होता है.

मदद मांगने वही इंसान तो आता है, जिसके पास किसी चीज का अभाव होता है. अब यदि आपके पास वह चीज पर्याप्त मात्रा में है तो जरूरतमंद को वह चीज प्रदान करने में आपको लेश मात्र भी संकोच नहीं करना चाहिए.

हमें उस परमपिता का एहसानमंद होना चाहिए कि उसने हमें किसी की मदद करने के काबिल बनाया है. अगर हम इस काबिल हैं, इतने सक्षम हैं कि किसी की सहायता कर सकते हैं तो यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है.

दुनिया में बहुत लोग हैं, लेकिन हर कोई दूसरों की मदद कर पाने के योग्य नहीं होता. हर किसी के पास वह सब कुछ नहीं होता जो कि वह दूसरों को प्रदान कर सकें. लेकिन अगर आपके पास ऐसा कुछ है, जिससे कि दूसरे लोगों की जरा भी मदद हो सके तो ऐसा करने में हमें किंचित भी हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए.

यदि कोई दीन-हीन आपके पास मदद की उम्मीद और आस लेकर आया है तो आपको किसी भी सूरत में उसे निराश नहीं लौटाना चाहिए. पता नहीं किस घड़ी में उसे यह ख्याल आया होगा कि अगर वह आपके दर पर आता है तो आप उसे खाली हाथ नहीं लौट आएंगे, उसकी उम्मीद को पूरा जरूर करेंगे.

आपको ऐसा करना भी चाहिए क्योंकि आप इस काबिल हैं कि कोई आपकी तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख सकता है. आपसे उसे आशा है कि आप उसकी परिस्थिति को देखते हुए यथासंभव उसकी मदद करेंगे. उसे उसकी वर्तमान परिस्थिति से बाहर निकालेंगे और उसे यथा योग्य एवं यथासंभव सहायता प्रदान करेंगे.

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दूसरों की मदद कैसे करें (How to Help Others)?

यह जरूरी नहीं होता कि हम सदैव दूसरों की आर्थिक मदद करें तो ही वह मदद कहलायेगी. नहीं, अगर हम किसी की भावनाओं की कद्र करते हैं, उसे भावनात्मक संबल प्रदान करते हैं, उससे तनिक भी सहानुभूति दिखाते हैं तो यह भी एक प्रकार की उच्च कोटि की मदद ही कहलाती है.

यदि हम किसी के दुख-दर्द को ध्यान पूर्वक सुन लेते हैं और उसे बदले में सहानुभूति पूर्वक कुछ उचित करने का आश्वासन भी देते हैं या उसे सही सलाह भी प्रदान कर देते हैं तो यह भी सामने वाले के लिए बहुत बड़ा संबल होगा, उसके लिए बहुत बड़ी सहायता होगी.

सेवा भाव हर किसी के स्वभाव में होता भी कहां है? सेवा भी वही कर सकते हैं जिनका हृदय निर्मल होता है, जिनके मन में कोई पाप नहीं होता और जो निष्कपट होते हैं. ऐसे इंसान किसी भी  मनुष्य को इसी भाव से देखते हैं कि उनमें भी ईश्वर का वही अंश विद्यमान है जो हमारे अंदर भी मौजूद है.

हम अपने जीवन में चाहे जितना ऊपर उठ जायें, चाहे जितनी प्रसिद्धि को प्राप्त कर लें या चाहे जितनी प्रतिष्ठा हमारे पास हो, हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे बुरे समय में जरूर किसी ना किसी ने हमारी भी मदद की होगी. तभी आज हम इन ऊंचाइयों पर विराजमान होने के सुख का उपभोग कर रहे हैं.

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मदद करने से आपको क्या मिलेगा (What you will get help to others)?

किसी जरूरतमंद की मदद करने से हम ना केवल अपना परलोक सुधारते हैं, बल्कि साथ ही साथ जरूरतमंद को आवश्यक सहायता मुहैया हो जाने से उसकी खुशियां भी कई गुना हो जाती हैं. हमें यथासंभव जरूरतमंद की सहायता जरूर करनी चाहिए.

आपकी मदद पाकर जरूरतमंद इंसान  के चेहरे पर अगर थोड़ी सी भी मुस्कुराहट आ जाती है, उसके दुखों में जरा सी भी कमी आ जाती है तो यह मान कर चलिए कि आपने परमपिता परमेश्वर का स्मरण कर लिया है एवं उसकी सच्ची आराधना कर ली है.

किसी जरूरतमंद और असहाय इंसान की मदद करने से नर सेवा, नारायण सेवा अपने सच्चे रूप में चरितार्थ हो जाती है. यही सच्ची ईश्वर भक्ति है, यही सच्ची नारायण सेवा है. इंसान के रूप में अगर हम भगवान को देखते हैं तो हमें उसी रूप में उसका स्मरण, उसकी पूजा, उसकी आराधना करनी चाहिए.

किसी की मदद करने वाले दो हाथ परमपिता परमेश्वर की आराधना में जुड़ने वाले दो हाथों से भी अधिक पवित्र माने जाते हैं. अगर हम किसी की तनिक भी सहायता करते हैं तो वह ऊपर बैठा ईश्वर किसी ना किसी को हमारी मदद के लिए किसी ना किसी रूप में जरूर भेज देता है.

आप इस चीज को अपने जीवन में एक बार आजमा कर जरूर देखिए. अगर आपने किसी की भलाई की है, किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट लाने का यथार्थ प्रयास किया है तो कोई ना कोई किसी न किसी रूप में आपके लिए भी फरिश्ते के रूप में ना जाने कब और कहां से जरूर अवतरित हो जाएगा.

उस दिन आपको पूरा यकीन आ जाएगा कि किसी के लिए सच्चे मन से किया गया भलाई का छोटा सा कार्य भी बहुत बड़ा पुण्य का काम है और उस दिन आपका विश्वास करने लगेंगे कि नर में ही नारायण बसते हैं.

हम किसी के प्रति अच्छाई दिखाते हैं और उसकी जरा भी सहायता करते हैं तो यह दर्शाता है कि हमारे आंतरिक हृदय में मनुष्यता का बहुत बड़ा अंश अभी भी विद्यमान है. हमें ईश्वर ने सेवा भावना और प्रभु भक्ति के गुण से नवाजा है. उस महा दयालु, दीनानाथ ने हमें इंसान बना कर हम बहुत बड़ा उपकार किया है.

इसी कारणवश इंसान होने के नाते हमें दीन- दुखियों, दरिद्र नारायण, किंचित, वंचित, शोषित, शोणित और दुखी जनों को अपनी यथासंभव मदद जरूर करनी चाहिए. अगर हम ऐसा कर पाए यकीन मानिए ना केवल हम मनुष्य कहलाने का गौरव प्राप्त करेंगे बल्कि उस परलोक में अपने लिए परम पद भी अग्रिम में सुरक्षित कर पाएंगे.

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तो दोस्तों ! ये थी आज की पोस्ट-आओ एक दूसरे की मदद करें(Let Us Help Each Other).आज की ये पोस्टआपको कैसी लगी, हमें अपनी राय या Suggestion जरुर बताइयेगा. और भी ऐसे बेहतरीन लेख पाने के लिए आप हमें Subscribe जरुर कीजिये.

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